महाराष्ट्र में मांग मजबूत, FCI नीलामी पर बाजार की नजर

26 अगस्त को मक्का बाजार में कुल मिलाकर मजबूती का रुख देखने को मिला। महाराष्ट्र के प्लांटों में खरीदी सक्रिय बनी हुई है, जबकि पोल्ट्री और फीड सेक्टर की मांग भी बाजार को सपोर्ट दे रही है। बांग्लादेश की मांग और कुछ क्षेत्रों में सीमित आवक के चलते मक्का के भाव को सहारा मिल रहा है। महाराष्ट्र में प्लांट खरीदी मजबूत बनी हुई है। प्रमुख प्लांटों में मक्का के भाव करीब ₹2,630 से ₹2,850 प्रति क्विंटल के दायरे में रहे। कई प्लांटों में भाव बढ़ाए गए हैं, जिससे बाजार में खरीदारों की सक्रियता का संकेत मिल रहा है। दक्षिण भारत में भी प्लांट खरीदी मजबूत है और कुछ केंद्रों पर भाव ₹2,800 से ऊपर बने हुए हैं। मंडियों की बात करें तो गुलाबबाग में ₹2,390–₹2,510, स्कीन बाजार में ₹2,360–₹2,500, कटिहार में ₹2,220–₹2,450 और सांगली में ₹2,625–₹2,800 प्रति क्विंटल के भाव रहे। कुड़चूम और लोनंद जैसे बाजारों में भी भाव मजबूत रहे, हालांकि कुछ मंडियों में कमजोरी देखने को मिली। गुजरात में भी कई प्लांटों पर तेजी का रुख रहा। कुछ प्लांटों में ₹20 से ₹75 प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि नेपालपुर मेटर में ₹85 की कमजोरी रही, जिससे साफ है कि बाजार में तेजी फिलहाल चुनिंदा क्षेत्रों और प्लांटों तक सीमित है। मक्का बाजार के लिए 27 अगस्त की FCI टूटे चावल की नीलामी महत्वपूर्ण रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार नीलामी में करीब 1.71 लाख MT टूटे चावल की मात्रा और ₹2,100 प्रति क्विंटल का रिजर्व प्राइस है। यदि सस्ता टूटे चावल बाजार में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है, तो यह मक्का की मांग पर कुछ दबाव डाल सकता है। फिलहाल मक्का में तेजी के पक्ष में महाराष्ट्र की मजबूत प्लांट खरीदी, पोल्ट्री-फीड की मांग, बांग्लादेश की मांग और कुछ क्षेत्रों में सीमित आवक जैसे फैक्टर हैं। दूसरी ओर, FCI नीलामी और कुछ कमजोर मंडियों के भाव बाजार के लिए नकारात्मक संकेत हैं। आगे के लिए ₹2,400 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं ₹2,500 के ऊपर टिकाव मिलने पर बाजार में ₹2,650 और उसके बाद ₹2,700–₹2,800 के स्तर की तरफ तेजी की संभावना बन सकती है। फिलहाल बाजार का रुख “मजबूत से चुनिंदा तेजी वाला” है। कुल मिलाकर, मक्का बाजार में सेंटीमेंट सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन ऊंचे भाव पर नई खरीदारी में सावधानी जरूरी है। व्यापारियों को प्लांट डिमांड, मंडी आवक और FCI नीलामी के परिणामों पर नजर रखते हुए ही आगे की रणनीति बनानी चाहिए।

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