नाफेड की सख्ती से चना बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी, ₹6500 प्रति क्विंटल के स्तर की ओर बढ़ने के प्रबल संकेत
देशभर के चना बाजार में मजबूती का माहौल लगातार चौथे दिन भी बना रहा। सरकारी एजेंसी नाफेड द्वारा ₹6000 प्रति क्विंटल से नीचे प्राप्त टेंडरों को अस्वीकार किए जाने के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल और मजबूत हो गया है। व्यापारियों का मानना है कि नाफेड के इस रुख ने बाजार को स्पष्ट संदेश दिया है कि वर्तमान स्तर से नीचे कीमतों को स्वीकार करने की संभावना कम है, जिससे खरीदारों का भरोसा बढ़ा है और विक्रेताओं की बिकवाली कमजोर हुई है। दिल्ली लाइन में चना का भाव बढ़कर ₹6100 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। पिछले एक सप्ताह में दिल्ली बाजार में लगभग ₹150 प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई है। 7 जुलाई को जहां दिल्ली लाइन का भाव ₹5950 प्रति क्विंटल था, वहीं 11 जुलाई को ₹6000, 13 जुलाई को ₹6025 और 14 जुलाई को ₹6100 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। इसी प्रकार जयपुर बाजार में भी चना के भाव ₹5950 से बढ़कर ₹6075 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। देश की प्रमुख मंडियों में भी चना की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। जयपुर देसी चना ₹6075 प्रति क्विंटल, रायपुर लोकल ₹6175–6200, महाराष्ट्र लाइन ₹6325–6350, अकोला ऑल पेड ₹6325–6350, नागपुर देसी ₹6200–6250, कानपुर ₹6300 तथा हैदराबाद काबुली लाइन ₹6450–6600 प्रति क्विंटल के स्तर पर कारोबार कर रही है। अधिकांश मंडियों में सीमित आवक और मजबूत खरीद के कारण भाव स्थिर से मजबूत बने हुए हैं। घरेलू बाजार के साथ-साथ आयातित चना बाजार भी कीमतों को मजबूत आधार दे रहा है। मुंबई में ऑस्ट्रेलियाई चना ₹6000–6075, मुंद्रा एवं कांडला बंदरगाह पर ₹5900–5950 तथा कोलकाता में ₹6300–6350 प्रति क्विंटल के भाव दर्ज किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऑस्ट्रेलिया के नवंबर–दिसंबर शिपमेंट का CNF ऑफर लगभग 600 डॉलर प्रति टन, अगस्त–सितंबर शिपमेंट 585 डॉलर प्रति टन, अक्टूबर–नवंबर शिपमेंट 595 डॉलर प्रति टन तथा तंजानिया की नई फसल 625 डॉलर प्रति टन के आसपास बनी हुई है। ऊंचे आयात मूल्य भी घरेलू बाजार में गिरावट की संभावना को सीमित कर रहे हैं। इंदौर में काबुली चना के भाव फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। 42–44 काउंट ₹9750, 44–46 काउंट ₹9450, 50–52 काउंट ₹8300, 58–60 काउंट ₹7450 तथा 60–62 काउंट ₹7300 प्रति क्विंटल के स्तर पर कारोबार हो रहा है। व्यापारियों का मानना है कि यदि देसी चना में तेजी जारी रहती है तो आने वाले समय में काबुली चना को भी इसका सकारात्मक प्रभाव मिल सकता है। देश के अधिकांश कृषि बाजारों में चना की आवक सामान्य से कम बनी हुई है। किसानों द्वारा बेहतर कीमतों की उम्मीद में माल रोककर रखने से खुले बाजार में उपलब्धता सीमित बनी हुई है। दूसरी ओर, दाल मिलों, बेसन उद्योग और थोक व्यापारियों की खरीद धीरे-धीरे बढ़ रही है। मांग में सुधार और सीमित आपूर्ति के कारण बाजार को लगातार मजबूती मिल रही है। बाजार विशेषज्ञों और व्यापारियों का मानना है कि वर्तमान तेजी केवल सट्टा गतिविधियों के कारण नहीं बल्कि मजबूत मूलभूत कारकों पर आधारित है। नाफेड की सख्त खरीद नीति, ऊंचे आयात मूल्य, सीमित आवक, कमजोर बिकवाली तथा धीरे-धीरे बढ़ती उपभोक्ता मांग मिलकर चना बाजार को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। यदि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रहती है, तो दिल्ली लाइन में ₹6200–6250 प्रति क्विंटल का स्तर जल्द देखने को मिल सकता है। तकनीकी दृष्टि से दिल्ली चना बाजार का पहला मजबूत सपोर्ट ₹6000 प्रति क्विंटल तथा दूसरा सपोर्ट ₹5900–5950 प्रति क्विंटल पर माना जा रहा है। वहीं ₹6200–6250 प्रति क्विंटल का स्तर प्रमुख प्रतिरोध (Resistance) रहेगा। यदि यह स्तर मजबूत खरीद के साथ पार होता है, तो बाजार में ₹6500 प्रति क्विंटल का अगला लक्ष्य प्राप्त होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। वर्तमान परिस्थितियों में चना बाजार का रुझान स्पष्ट रूप से मजबूत दिखाई दे रहा है। नाफेड की सख्ती, कम आवक, मजबूत आयात लागत और धीरे-धीरे बढ़ती मांग जैसे कारकों से बाजार को निरंतर समर्थन मिल रहा है। यदि इन कारकों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता, तो आने वाले दिनों में चना के भाव में ₹300–400 प्रति क्विंटल तक की अतिरिक्त तेजी देखने को मिल सकती है और दिल्ली लाइन में ₹6500 प्रति क्विंटल का स्तर निकट भविष्य में संभव माना जा रहा है।