डीओसी की कमजोर खरीद से सोयाबीन की तेजी थमी

सोयाबीन बाजार में इस सप्ताह शुरुआत में मजबूत रुख देखने को मिला, क्योंकि सोया डीओसी (DOC) की मांग बढ़ने से कीमतों में लगभग ₹150-₹200 प्रति क्विंटल तक सुधार दर्ज किया गया। हालांकि सप्ताह के अंतिम चरण में डीओसी की मांग कमजोर पड़ने से बाजार में फिर नरमी लौट आई और अधिकांश प्रमुख बाजारों व प्लांटों में ऊपरी स्तरों से भाव फिसल गए। कीर्ति प्लांट में सोयाबीन का भाव पहले करीब ₹220 बढ़ा, लेकिन बाद में ₹120 की गिरावट के साथ ₹7,450 प्रति क्विंटल पर आ गया। इंदौर मंडी में भी शुरुआत में लगभग ₹300 की तेजी दर्ज हुई, जबकि सप्ताह के अंत तक ₹50 की कमजोरी के बाद भाव ₹7,000 प्रति क्विंटल रह गया। इसी प्रकार गोयल कोटा प्लांट में ₹200 की तेजी के बाद ₹100 की गिरावट आई और अंतिम भाव ₹8,000 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। धुलिया दीसान प्लांट पर भी पहले ₹325 की उल्लेखनीय बढ़त देखने को मिली, लेकिन बाद में ₹100 टूटने से भाव ₹7,225 प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ 2026 सीजन में देशभर में सोयाबीन की बुवाई लगभग 90% से 91% तक पूरी हो चुकी है। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में बुवाई क्षेत्र अधिक रहने का अनुमान है। बेहतर बाजार भाव मिलने से किसानों का रुझान फिर से मक्का छोड़कर सोयाबीन की खेती की ओर बढ़ा है। सोपा (SOPA) का कहना है कि सरकारी आंकड़ों की तुलना में वास्तविक खेतों में बुवाई 7 से 10 दिन आगे चल रही है। मध्य प्रदेश में लगभग 90% बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 80% से 90% के बीच पहुंच चुका है। हालांकि कुछ जिलों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से बुवाई की गति प्रभावित हुई है। राजस्थान में फिलहाल केवल 35% से 40% बुवाई पूरी हुई है और मानसून के तेज होने पर इसमें तेजी आने की संभावना है। दूसरी ओर, अगले दो सप्ताह के दौरान महाराष्ट्र में सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान भी जताया गया है। सरकार द्वारा जारी सोयाबीन की नीलामी का प्रभाव समय-समय पर बाजार पर दिखाई दे रहा है। इसी बीच सोपा (SOPA) ने सरकार से वर्तमान समय में हो रही सोयाबीन बिक्री तत्काल रोकने की मांग की है। संगठन का तर्क है कि बुवाई के दौरान सरकारी स्टॉक बाजार में आने से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। मौजूदा स्टॉक की स्थिति पर नजर डालें तो पिछले वर्ष की तुलना में उपलब्धता काफी कम है। इसी कारण प्लांट संचालकों को नए सीजन की आवक शुरू होने तक कच्चे माल की कमी की आशंका बनी हुई है। यही वजह है कि वे बाजार में भाव ऊपर हों या नीचे, हर स्तर पर सक्रिय रूप से सोयाबीन की खरीद कर रहे हैं। अब बाजार की दिशा काफी हद तक मौसम पर निर्भर मानी जा रही है। यदि बारिश की कमी और अत्यधिक गर्मी का असर जारी रहता है तथा जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त के दौरान मौसम प्रतिकूल रहता है, तो सोयाबीन उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ सकती है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए निकट भविष्य में सोयाबीन में बहुत बड़ी तेजी या भारी गिरावट की संभावना फिलहाल नहीं दिखाई देती। ऐसे में बुवाई के मौसम में ऊंचे दामों पर बड़ा स्टॉक बनाना आगे चलकर नई आवक बढ़ने पर घाटे का कारण बन सकता है। व्यापारिक दृष्टि से गिरावट के समय खरीदारी और भाव बढ़ने पर मुनाफावसूली की रणनीति अधिक उपयुक्त मानी जा रही है, क्योंकि मौजूदा स्तरों पर लंबे समय के लिए स्टॉक रोकना लाभकारी नहीं माना जा रहा। तकनीकी दृष्टि से कीर्ति प्लांट पर ₹7,000 प्रति क्विंटल का मजबूत दीर्घकालिक सपोर्ट बना हुआ है और अल्पकाल में भाव के ₹7,250 से नीचे जाने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। अनुमान है कि निकट अवधि में कीर्ति प्लांट पर सोयाबीन का दायरा ₹7,250 से ₹7,800 प्रति क्विंटल के बीच रह सकता है। ₹7,750 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है और इसके ऊपर टिकाऊ कारोबार होने के बाद ही नई तेजी की संभावना बनेगी। तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की उम्मीद है। व्यापारियों और किसानों को अपने विवेक से ही खरीद-बिक्री के निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।

Insert title here