हाजिर माल की भारी कमी के चलते उड़द के भाव ₹9,000 तक पहुंचने की संभावना

उड़द के आयात महंगे होने और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज कमजोरी आने के कारण चेन्नई, दिल्ली और मुंबई के आयातकों के पास इस समय सीमित स्टॉक ही उपलब्ध है। वहीं दाल मिलों ने अपनी आवश्यकता के अनुसार पहले ही खरीद कर ली थी, जिसके चलते पाइपलाइन में माल की उपलब्धता नहीं के बराबर है। इसी बीच रंगून (म्यांमार) में छोटे और मोटे दोनों प्रकार के उड़द के भाव एक सप्ताह के भीतर 20-25 डॉलर प्रति टन तक मजबूत हो गए हैं। इसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे रहा है और चालू माह में ₹500 प्रति क्विंटल तक की और तेजी के आसार बन गए हैं। गौरतलब है कि पिछले एक महीने से सहारनपुर गंगोह क्षेत्र में उड़द की आवक लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। पिछले महीने छोटे दाने का भाव लगभग ₹7,000 प्रति क्विंटल और मोटे दाने का ₹7,700 प्रति क्विंटल के निचले स्तर तक आ गया था। लेकिन चेन्नई से माल की उपलब्धता न होने और रंगून में भाव बढ़ने के कारण दाल मिलें अब हाजिर कंटेनरों की खरीद करने लगी हैं, जिससे कीमतों में तेज उछाल आया है। वर्तमान में छोटे दाने का उड़द लगभग ₹7,750 प्रति क्विंटल और मोटे दाने का ₹8,450 प्रति क्विंटल के आसपास बिक रहा है। चेन्नई में हाजिर माल की भारी कमी को देखते हुए मोटे उड़द के भाव निकट भविष्य में ₹9,000 प्रति क्विंटल तक पहुंचने की संभावना है। चंदौसी लाइन की बात करें तो अनुमान है कि वहां की अधिकांश फसल स्थानीय स्तर पर ही खप चुकी है और बड़े व्यापारिक चैनलों तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में मौजूदा भाव पर उड़द में कम समय में ₹500 प्रति क्विंटल तक की तेजी संभव मानी जा रही है। कुल मिलाकर पूरे व्यापारिक तंत्र में स्टॉक की स्थिति बेहद तंग बनी हुई है। आने वाले समय में चेन्नई से कंटेनरों की आवक भी सीमित रहने की संभावना है। इसके अलावा कोई नई देसी फसल आने वाली नहीं है, जिससे हाजिर कारोबार को समर्थन मिलता रहेगा। हालांकि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में उड़द की बिजाई लगभग 17-18 प्रतिशत अधिक हुई थी, लेकिन फसल अवधि के दौरान हुई बेमौसमी बारिश के कारण कटाई में देरी हुई और गुणवत्ता प्रभावित हुई। नतीजतन, अधिक बिजाई के बावजूद उत्पादन में लगभग 30-32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। चंदौसी, सहारनपुर और गंगोह क्षेत्रों की फसल पहले ही समाप्त हो चुकी है। शुरुआत में देश में उड़द का कुल उत्पादन 49-50 लाख मीट्रिक टन आंका गया था, लेकिन संशोधित अनुमान के अनुसार वास्तविक उत्पादन अब केवल 36-37 लाख मीट्रिक टन रह गया है। चूंकि पिछले वर्ष भी एमपी और महाराष्ट्र से उत्पादन कम रहा था, इसलिए बाजार में कहीं भी स्टॉक का दबाव नहीं है। चेन्नई में भी पिछले वर्ष की तुलना में स्टॉक काफी कम बताया जा रहा है।

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