सोयाबीन उत्पादन में गिरावट और बढ़ती निर्यात मांग से सोया डीओसी में और तेजी की संभावना

इस सीजन में सोयाबीन का उत्पादन घटकर लगभग 98-100 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है। वहीं दूसरी ओर, क्रशिंग गतिविधियां काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आपूर्ति का दबाव बना हुआ है। इन कारणों से सोया डी-ऑयल्ड केक (डीओसी) के भाव में तेज मजबूती आई है और आगे चलकर लगभग ₹10,000 प्रति टन तक और बढ़ोतरी की संभावना दिखाई दे रही है। इसके साथ ही सोयाबीन के भाव भी और तेज होने की उम्मीद है। सोयाबीन की कटाई को लगभग चार महीने हो चुके हैं। बुवाई के 15 दिन बाद से लगातार हुई बारिश और फसल पकने के समय बेमौसमी वर्षा के कारण शिवपुरी, दतिया, सुजालपुर, नीमच, दाहोद, कोटा, अकोला और जलगांव जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल को भारी नुकसान हुआ। पिछले तीन वर्षों में देश में सोयाबीन का उत्पादन 130-135 लाख मीट्रिक टन के बीच रहा था, लेकिन इस वर्ष उत्पादन में तेज गिरावट आई है। पहले अच्छी गुणवत्ता का लूज सोयाबीन मंडियों में ₹3,700-3,800 प्रति क्विंटल बिक रहा था, जो अब बढ़कर ₹4,600-4,650 प्रति क्विंटल हो गया है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में प्लांट पहुंच भाव ₹5,050-5,150 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। कटाई के समय सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर भी खरीद की थी, जो उस समय मंडी भाव से ₹1,300-1,400 प्रति क्विंटल अधिक था। वर्ष 2024-25 में सोयाबीन का एमएसपी ₹4,892 प्रति क्विंटल था, जिसे वर्ष 2025-26 के लिए ₹436 बढ़ाकर ₹5,328 प्रति क्विंटल कर दिया गया है। वर्ष 2024-25 के खरीफ सीजन में सोया डीओसी का निर्यात पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 23-24 प्रतिशत अधिक रहा है। इसी कारण नीमच लाइन में सोया डीओसी, जो पहले ₹27,500 प्रति टन तक नीचे आ गया था, अब बढ़कर ₹37,500-37,700 प्रति टन हो गया है। कोटा लाइन में एक्स-प्लांट भाव ₹38,200-38,400 प्रति टन पर कारोबार हो रहा है। वहीं भारतीय बंदरगाहों पर निर्यातकों द्वारा ₹41,500-42,000 प्रति टन पहुंच में खरीद की जा रही है। सरकार की एमएसपी खरीद, जिसमें लगभग 45-48 प्रतिशत प्रोटीन ग्रेड सोयाबीन शामिल था, के चलते किसानों ने पिछले वर्ष की तुलना में अधिक माल बेचा है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोया डीओसी के ऊंचे भाव के कारण राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के प्लांटों से समुद्री मार्ग सहित निर्यात में तेजी आई है। इस वर्ष बाजार में स्टॉक की उपलब्धता काफी कम है। नीमच लाइन में आवक गत वर्ष की तुलना में लगभग 32 प्रतिशत कम बताई जा रही है, जबकि दतिया और सुजालपुर लाइनों में भी स्टॉक कम है। राजस्थान और महाराष्ट्र की मंडियों में भी 12-15 प्रतिशत तक कम उपलब्धता देखी जा रही है। इसके चलते सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन प्लांटों को डीओसी बनाने के लिए सोयाबीन बीज महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है। वर्तमान में कोटा लाइन में सोया डीओसी ₹38,400-38,500 प्रति टन एक्स-प्लांट में बिक रहा है, जिसके भाव आगे चलकर ₹48,000 प्रति टन तक पहुंच सकते हैं। वहीं प्लांट पहुंच में ₹5,100-5,150 प्रति क्विंटल बिक रहा सोयाबीन आगे चलकर ₹6,000 प्रति क्विंटल तक जा सकता है। इससे आगे की तेजी मौसम की स्थिति और अगली बुवाई पर निर्भर करेगी। हालांकि वैश्विक व्यापार तनाव के कारण थोड़ा जोखिम जरूर बढ़ा है, लेकिन नई सोयाबीन फसल आने में अभी करीब आठ महीने का समय है और मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा महाराष्ट्र की मंडियों में आवक सीमित बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत भाव को देखते हुए जून तक सोया डीओसी का निर्यात जोरदार बने रहने की संभावना है। इसलिए मौजूदा भाव स्तर को कम जोखिम वाला माना जा रहा है।

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