क्या मक्का बाजार को निर्यात से सहारा मिलेगा?

खरीफ मक्का सीजन के शुरुआती दौर में दबाव के बाद बाजार को कुछ समय के लिए बढ़े हुए निर्यात से सहारा मिला था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मक्का के भाव गिरने से भारतीय मक्का की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कम हो गई, जिसके कारण निर्यात मांग घट गई। इसके परिणामस्वरूप दिसंबर के अंत तक बाजार फिर से फिसलने लगा और जनवरी भर यह गिरावट का रुख बना रहा। मंगलवार को बिहार और मध्य भारत के मक्का बाजारों में भारी दबाव देखा गया, जहां भाव 20 से 30 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए। गुलाबबाग मंडी में मक्का के भाव 20 रुपये घटकर 2,070 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। दिल्ली में भाव 2,250 रुपये, छिंदवाड़ा में 1,855 रुपये, इंदौर स्थित तिरुपति स्टार्च प्लांट में 1,770 रुपये और राजकोट में 1,750 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किए गए। मध्य प्रदेश की इटारसी मंडी में भी मक्का के भाव 30-40 रुपये टूटकर लगभग 1,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। वहां कल करीब 7,000 से 8,000 बोरी की भारी आवक दर्ज की गई। फिलहाल बाजार में स्टॉक भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं, जबकि मांग काफी सीमित बनी हुई है। इस असंतुलन के कारण कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है। स्टॉकधारक धीरे-धीरे धैर्य खो रहे हैं और अपना माल बाजार में उतार रहे हैं, जिससे बिकवाली का दबाव और बढ़ गया है। औद्योगिक क्षेत्र और एथेनॉल निर्माताओं की ओर से मांग भी इस समय कमजोर है और निर्यात से भी कोई खास सहारा नहीं मिल रहा है। नतीजतन, मक्का बाजार एक बार फिर अपने निचले भाव स्तरों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पूर्वी भारत में कल खरीदारों की गतिविधि बेहद कमजोर रही और कुछ इलाकों में खरीद लगभग ठप रही। मंडी मार्केट मीडिया के अनुसार, जब तक निर्यात मांग या घरेलू खपत में उल्लेखनीय सुधार नहीं होता, तब तक मक्का के भावों में तेजी की संभावना कम है। कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में बिहार सहित अन्य राज्यों में मक्का के भाव स्थिर से कमजोर दायरे में बने रहने की उम्मीद है, साथ ही हल्की और गिरावट की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। लंबे समय के नजरिये से देखें तो मार्च के अंतिम सप्ताह तक बाजार की स्थिति में बदलाव आ सकता है, लेकिन अभी उस मोड़ में समय है।

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