गेहूं के भाव स्थिर से कमजोर; एफसीआई नीलामी से पहले बाजार सतर्क
मंगलवार को देश के प्रमुख गेहूं बाजारों में भाव स्थिर से कमजोर रहे। खरीदार नए सौदों में सतर्क नजर आए और अधिकांश बाजार सहभागियों ने बुधवार को होने वाली भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की नीलामी के नतीजों का इंतजार करना बेहतर समझा, ताकि निकट अवधि की दिशा स्पष्ट हो सके। उत्तर भारत में पंजाब की मंडियों में लगातार दूसरे सत्र में गेहूं के भाव ₹10-20 प्रति क्विंटल टूटे। दिल्ली में कीमतें ₹20-40 घटकर ₹2,860-2,880 प्रति क्विंटल रह गईं, जबकि उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में भाव लगभग स्थिर रहते हुए ₹2,700-2,720 प्रति क्विंटल के दायरे में कारोबार करते दिखे। मध्य और पश्चिम भारत में भी बाजार दबाव में रहे। राजस्थान में कीमतें ₹50 और मध्य प्रदेश में ₹25 प्रति क्विंटल तक घटीं, जिससे भाव ₹2,650-2,700 प्रति क्विंटल के आसपास रहे। दक्षिण और पूर्वी भारत में प्रमुख खपत केंद्रों-बेंगलुरु (₹3,060) और कोलकाता (₹3,050) में भी ₹20 प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई, जिससे हालिया तेजी का कुछ हिस्सा वापस ले लिया गया। व्यापारियों के अनुसार, बुधवार को होने वाली एफसीआई नीलामी बाजार को तत्काल दिशा देगी। यदि नीलामी में मजबूत बोली देखने को मिलती है तो भावों में सुधार संभव है, जबकि कमजोर भागीदारी मौजूदा मंदी को और लंबा खींच सकती है। बाजार एफसीआई नीलामियों की आवृत्ति पर भी नजर रखे हुए है यदि नीलामी में विराम आता है तो अल्पकालिक समर्थन मिल सकता है, वहीं नई नीलामियां तेजी पर अंकुश लगा सकती हैं। फरवरी से गुजरात से नई फसल की आवक शुरू होने की संभावना भी कीमतों पर स्वाभाविक दबाव बना रही है। इसके अलावा, 2026-27 सीजन के लिए सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ₹2,585 प्रति क्विंटल भी बाजार धारणा को प्रभावित कर रहा है। मौजूदा हालात में गेहूं के भावों में तेज उछाल की गुंजाइश सीमित नजर आती है। लगातार सरकारी बिक्री और नई फसल की नजदीकी आवक के चलते बड़े भंडार रखना महंगा सौदा साबित हो सकता है। व्यापारी अब बुधवार की एफसीआई नीलामी में बोली और पेशकश के अनुपात पर करीबी नजर रखे हुए हैं, जिससे बाजार की अगली चाल का अंदाजा लगाया जा सके।